चलने के ढंग से विवरण जानें

1. कोई व्यक्ति कब, क्यों और कैसा सोचता है, उसके चलने के ढंग से पता चल सकता है.
2. चाल भीतर छुपी अच्छाई-बुराई, गुण-अवगुण का पूरा-पूरा ब्यौरा देती है, जैसे मनुष्य कब खुश है, कब तनाव में है, गंभीर है या कुछ सोच रहा है आदि.
3. यदि कोई व्यक्ति हाथ खोल कर, हाथ हिलाते हुए चलता है, तो वह व्यक्ति बहुत ही संवेदनशील, आत्मनिर्भर तथा आत्मविश्वासी है, बिना झिझके वह लोगों से बातचीत कर लेता है, और किसी भी नए काम को करने में घबराता नहीं है.
4. उसमें हर नए परिवर्तन तथा घटना को स्वीकारने की क्षमता होती है, झूठ और चालाकी से सख्त नफरत होती है, सीधी-सीधी बातों को सीधा-सीधा जवाब अच्छा लगता है तथा रहन-सहन में सफाई पसंद आती है.
5. यदि कोई व्यक्ति अपने हाथों को बगल में बांधकर या सटाकर चलता है, तो वह ज़रूरत से ज्यादा स्वाभिमानी है, अपने नियम व उसूल आदि स्वयं बनाना पसंद करता है, और अपनी बातों व किए गए वादों तथा वचनों पर दृढ़ रहता है.
6. वह सुनता सबकी है पर करता अपने मन की है, दूसरों की मदद लेने की बजाय अपनी समस्याएं स्वयं सुलझाना पसंद करता है, और यदि वह एक बात के पीछे पड़ जाए, तो इसकी जड़ तक पहुंच कर ही दम लेता है.
7. यदि किसी व्यक्ति के हाथ चलते वक़्त खुले रहते हैं पर हिलते नहीं हैं, तो वह गंभीर तबियत का है, उसके मस्तिष्क में सदा कोई न कोई विचार चलता ही रहता है, और एक साथ दो नावों पर सवार होने की कोशिश उसे जीवन में विपरीत परिणामों से भर देती है.
8. आत्मविश्वास की कमी के कारण वह ठीक समय पर ठीक नियोजन तथा निष्कर्ष निकालने में असमर्थ रह जाता है या फिर चूक जाता है, और दूसरे की आलोचना तथा कार्य में कमी निकालना उसकी आदत होती है.
9. यदि कोई व्यक्ति हाथ खोल कर चलता है और चलते समय उसके दोनों हाथों की मुठ्ठियाँ बंद रहती हैं, तो यह भीतर छिपी विभिन्न प्रतिभाओं को दर्शाता है, और वह अपनी सक्रिय सोच के कारण देर-सबेर, जैसे-तैसे अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है.
10. उसके विचार, रहन-सहन, आदतें, स्वभाव आदि आम आदमी से भिन्न होते हैं, तथा उसके बोलने में एक चमत्कारिक शक्ति होती है जो लोगों को सरलता से शीघ्र ही आकर्षित कर लेती है.